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Wednesday, April 24, 2019

लग गए

कुछ दौलत कमाने में लग गए
कुछ नाम बनाने में लग गए
हम तो जी रहे थे शायद?
और ये भुलाने में लग गए

तन्हाई की आदतें अब
दर्द कुरेदती है बेपरवाह
कुछ लोग समझने लगे मुझे
कुछ हमे समझाने लग गए

जिंदगी से छोटी ख्वाइशें हैं
ख्वाइशों में बसी जिंदगी
जो दर्द दिए थे तुमने कल
हम भूल गए थे कुछ अब
तुम याद दिलाने लग गए

वो कह रहे थे मुझसे कुछ
कुछ मुझसे जानने  लग गए
था कुछ ना उनका भी, पर
वो मुझे पाने में लग गए.

                                -Avdhesh Kuriyal

Monday, August 27, 2018

तेरा इश्क़ है.......

तेरा इश्क़ है। .......
बेसूद खोया मीरा की भक्ति सा,
तेरा इश्क़ है...
फूल से खिंचता उस भँवरे सा,
तेरा इश्क़ है....
मंदिर की पूजा और मस्जिद की अजान सा,
तेरा इश्क़ है.......
हुस्न से लिप्टा एक प्यारा सा लहजा,
तेरा इश्क़ है.....
पानी से घिरा कोई अोंस भरी रात सा,
तेरा इश्क़ है.......
मोहब्बत के पानी में धुलता उस पेड़ सा,
तेरा इश्क़ है.......
मुश्ताक़ किसी  चाह का तुझे पाना,
तेरा इश्क़ है.......
तुझे चाहना और चाहना,
तेरा इश्क़ है......
तेरा इश्क़ है.......
तेरा इश्क़ है.......

Friday, May 4, 2018

बताओ?

आऊं क्या साथ निभाने फिर?
याद आगयी जो मेरी तुम्हे,
आऊं क्या याद दिलाने फिर?
छोड़ गए जो सब तुम्हें,
 आऊं क्या साथ निभाने फिर?

तुम चल तो रही हो ना?
सहमी तो नहीं ,खुश तो हो ना?
क्या संवार लेती हो बालों को खुद ही?
कर लेती हो बातें खुद से?
बताओ?

बैठती हो अकेली क्या?
डरती तो नहीं, कहती तो हो ना?
क्या पी लेती हो चाय अकेले फिर?
मीठी तो होती है ना?
जलाती हो क्या अब भी
अदाओं से अपनी तुम; किसे?
बताओ?

तुम बोल तो रही हो ना?
खामोश तो नहीं,कोई सुन्न तो रहा है ना?
सुनाती हो सपने फिर किसे अब?
क्या अब भी रहता हूँ मैं?
करती हो चुगलियां अब किस से?
पसन्द आते हैं तुम्हें क्या सब अब ?
बताओ?

तुम महसूस तो कर रही हो ना?
बेवज़ह तो नहीं, मैं याद तो हूँ ना?
सुनाती हो दर्द किसे अब?
किसे लिपटकर रोती हो?
क्या लेती हो आघोश में उसे भी ?
सजाता है अपने लब पर मोती वो भी?
बताओ, चलो अब बता भी दो?

क्या जूठे हैं वो बर्तन अभी भी?
क्या करती है इंतज़ार वो मेज़ अब भी?
क्या ठहरता है सूरज वहाँ अब भी?
क्या धड़कता है दिल इंतज़ार में अब भी?
क्या लगती हो अधूरी मुझ बिन अब भी?
क्या गुनगुनाती हो मुझे अब भी?
क्या सुनाती हो मुझे कहीं अब भी?
क्या करती हो इंतज़ार अब भी?
बताओ, कुछ कहती क्यों नहीं ?
अब भी, आऊं क्या साथ निभाने?



Friday, April 13, 2018

ख़यालात........

"मेरे दिल में दफ़न जज़्बात,
तेरी ज़ुबान आगए,
तूने अभी छुवा भी नही,
मेरी रूह तेरे एहसास आगए,
अब आघोश में ले लिपटकर मुझे,
यूँ तेरे होने के ख़यालात आगए।"


"A love story, that begins with a dream and ends with a dream too..."

"I know her knavery & I know she is knave too,
I know she will come again & I know she will leave again too."

Wednesday, April 4, 2018

अनुगान....

असंयोजित नभ चर जाऊँ,
बंधे पंख फिर और फैलाऊँ,
उधर बादल मुझे पुकारे,
सूरज लाल फिर लज्जित होजाये,
हार संग न अब मै विलाप करूँ,
मैं जीत अनुगान करूँ 
मैं जीत अनुगान करूँ।

Wednesday, February 14, 2018

कहाँ ढूंडू सवेरा मैं?

कहाँ ढूंडू सवेरा मैं?
कहाँ करूँ बसेरा अब?
                    सूरज को जरा पूछो,
                    रात क्यूँ  न चढ़ता है?
अँधेरा आँख चुभता है,
सन्नाटा दर्द आवाज करता है;
                    चाँद से जरा पूछो,
                    अमावस क्यूँ न चमकता है?
दर्द ये शोर करता है,
वो रातों नहीं सोता,
                     इस दर्द को जरा पूछो,
                    वो रह-रह क्यूँ सिसकता है?
खिलतें फूल हैं कभी,
कभी झड़े पत्ते भी उड़ते हैं,
                    पतझड़ से जरा पूछो,
                    सावन क्यूँ तरसता है?
तरसती आज रूह मेरी,
खुदा तुझको जो पाने की,
                      क़ाज़ी से जरा पूछो,
                      कहाँ वो(ख़ुदा) बसेरा करता है?
कहाँ ढूंडू सवेरा मैं?
कहाँ करूँ बसेरा अब?
                     मेरे मौला मुझे बता दे,
                    अँधेरा इतना क्यूँ ठहरता है?

Sunday, February 11, 2018

एक अलग मजा....

एक अलग ही मजा है,
तेरे रंग में रंग जाने में,
रूठे तो तुझे मनाने में,
तेरे इश्क़ में,
हद्द से गुजर जाने में,
एक अलग ही मजा है

तुझे बेपनाह चाहने में,
तुझे खोने से डर जाने में,
तेरी आँखों में डूब जाने में,
एक अलग ही मजा ह

तेरी जुल्फें सुलझाने में,
बाँहों में समाने में,
तेरी यादों में खोजाने में,
हाँ,एक अलग ही मजा है;
तुझे बेइन्तेहाँ चाहने में

Thursday, January 18, 2018

तुझमे मैं तू बनु.......

यादों की, ख्वाबों की पहचान बनु,
आ फिर मैं तेरी साँसों की आवाज बनु,
घुलूं तुझमे फिर तुझमे तू बनु,
आ फिर तेरी अजान आवाज बनु,

तेरे रंगों की पहचान बनु,
जीत हार हर गान बनु,
कहानी तेरी किरदार बनु,
तेरी मूरत पहरेदार बनु,

आ फिर तुझमे मैं तू बनु,
आ फिर तुझमे मैं तू बनु,

कृष्ण तू तेरी राधा बनु,
सितार तू उसका धागा बनु,
ओंश में लिप्टा तेरा पानी बनु,
तेरा जीवन कहानी बनु,
आ फिर तुझमे मैं तू हर बार बनु,
आ फिर तुझमे मैं तू हर बार बनु। 

Friday, October 6, 2017

हौसला..

"start with a 'DESIRE', show your 'DEDICATION',then you will
automatically become a 'HARD WORKER',and at last you need 
PATIENCE'
to feel your 'GLORY'".

-Avdhesh Kuriyal







Wednesday, October 4, 2017

तू रंग मेरा...

तू कौन सा रंग है मेरा?
मैं सजने लगा तुझमे घुल के,
मैं रंग तेरा मेरा तू है,
खिलते रहे अब संघ बह के।

तू कौन तासीर है मेरी? 
कौन गीत सुरीला तू?
रात घनेरी काली तू,
और रात चाँद चमकीला तू।
तू घीत पुराना है मेरा,
वही राग सजीला तू।

आंसू तू ,हंसी रंग मुस्कान भी तू।
ईश्वर तू, अल्लाह भी तू,
ज़मीन रंग आसमान भी तू।
सजा फूल बाग़ भी तू,
शब्दों की आवाज भी तू,

तू उगता सूरज है मेरा,
सांझ लाल आसमान भी तू,
तू ख्याल मेरा,
रात,सपना और चाँद भी तू,
गर्म हवा शरद भी तू,
और शीत लहर ग्रीष्म भी तू।

मैं तेरा, और मेरा तू,
जीत, हार हर यार भी तू,
लहू तू, आँशु भी तू,
और हर कहानी जुबान भी तू।

तू शांत सवेरा है मेरा,
भीड़ शोर और चाल भी तू,
गीत, तर्रानुम तू मेरा,
और मृदंग ढोल ताल भी तू,

तू क्यों चंचल फिरता वन वन,
क्या ढूंढता बेसुद वन वन  यूँ?
मेरे हर हाल में तू, हर वाद में तू,
ये जीवन तू और ये सांस भी तू।